अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Theodore Roosevelt
अमेरिका की राजनीति में दो ही पार्टी का दबदबा रहा है. रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के इर्द—गिर्द ही वहां की राजनीति हमेशा से घूमती रही है, लेकिन एलन मस्क द्वारा नई पार्टी बनाने के एलान के बाद से वह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. थियोडोर रूजवेल्ट ने अमेरिका में दो पार्टियों के बीच सिमटी सत्ता के संघर्ष को 1912 में बड़ी चुनौती दी थी. ऐसा कर उन्होंने साबित किया था कि अमेरिकी राजनीति में भी तीसरी पार्टी के लिए विकल्प है. शर्त एक ही तीसरी पार्टी को नेतृत्व करने वाला दमदार शख्स हो और अमेरिकी जनता उस पर ऐतबार करे.
थियोडोर रूजवेल्ट ने रिपब्लिकन पार्टी से असंतुष्ट होकर 'प्रोग्रेसिव पार्टी' की नींव रखी, जिसे ‘बुल मूस पार्टी’ के नाम से भी जाना गया. उनका अभियान जनता के बीच आश्चर्यजनक रूप से लोकप्रिय रहा और उन्होंने उस चुनाव में करीब 27 फीसदी वोट पाकर दूसरा स्थान हासिल किया, जो किसी तीसरी पार्टी के लिए अमेरिकी इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है.
पहली बार ऐसे बने राष्ट्रपति
थियोडोर रूजवेल्ट के इस फैसले ने न केवल अमेरिकी लोकतंत्र में वैकल्पिक आवाजों की अहमियत को साबित किया था बल्कि रूजवेल्ट को तीसरी पार्टी बनाने वाले सबसे कामयाब नेता के रूप में स्थापित कर दिया.
थिओडोर रूजवेल्ट 14 सितंबर, 1901 को विलियम मैककिनले की हत्या के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति बने थे. साल 1904 में पूर्ण कार्यकाल के लिए चुने जाने पर उन्होंने घोषणा की कि वे इसे अपना दूसरा कार्यकाल मानते हैं और वह फिर से चुनाव नहीं लड़ेंगे. रूजवेल्ट जब पद से हटे तब उनकी आयु केवल 51 वर्ष थी और वे एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने में सक्षम थे. इसके बावजूद वह अपने वादे से पीछे न नहीं हटे.
थियोडोर रूजवेल्ट ने 1908 में रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में अपने उत्तराधिकारी के रूप में अपने युद्ध सचिव और करीबी मित्र विलियम हॉवर्ड टैफ्ट को चुना. विलियम हॉवर्ड टैफ्ट एक अनिच्छुक उम्मीदवार थे, जिनकी राष्ट्रपति बनने की कोई आकांक्षा नहीं थी.
थियोडोर रूजवेल्ट के बारे में जानें सब कुछ
राष्ट्रपति मैककिनले की हत्या के साथ, थियोडोर रूजवेल्ट, जो कि 43 वर्ष के भी नहीं थे, राष्ट्र के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रपति बन गए। उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए नया उत्साह और शक्ति लाई, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस और अमेरिकी जनता को प्रगतिशील सुधारों और एक मजबूत विदेश नीति की ओर जोरदार तरीके से आगे बढ़ाया।
सत्ता का अतिक्रमण नहीं किया - रूजवेल्ट
उनका मानना था कि राष्ट्रपति को "लोगों के संरक्षक" के रूप में जनता की भलाई के लिए जो भी आवश्यक हो वह करना चाहिए, जब तक कि कानून या संविधान द्वारा स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो। उन्होंने लिखा, "मैंने सत्ता का अतिक्रमण नहीं किया, लेकिन मैंने कार्यकारी शक्ति के उपयोग को काफी व्यापक बना दिया." रूजवेल्ट का जन्म 1858 में न्यूयॉर्क शहर में एक धनी परिवार में हुआ था,
बैरिस्टर शबाना महमूद
ब्रिटेन की राजनीति में नया इतिहास रचते हुए पाकिस्तानी मूल की बैरिस्टर शबाना महमूद वहां की पहली मुस्लिम महिला गृह मंत्री बन गई हैं. उनकी ताजपोशी सिर्फ़ पद और पहचान की वजह से सुर्खियों में नहीं बल्कि उनके राजनीतिक रुख़ और बेबाकी ने भी उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है. शबाना महमूद खुलकर फिलिस्तीन का समर्थन करती रही हैं और हमास की नीतियों की आलोचना करने से भी पीछे नहीं हटीं. ब्रिटेन की आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था की बागडोर संभालने के बाद से दुनिया की नजरें इस पर टिकी है कि उनकी नीतियां ब्रिटेन की विदेश और घरेलू राजनीति पर किस तरह असर डालेंगी.
कौन है शबाना महमूद?
शबाना महमूद का जन्म 17 सितंबर 1980 को बर्मिंघम में हुआ. उनके माता-पिता पाकिस्तानी मूल के हैं, जिनकी जड़ें मीरपुर, आज़ाद कश्मीर से जुड़ी हैं. बचपन का कुछ हिस्सा उन्होंने सऊदी अरब के ताइफ़ शहर में बिताया, जहां उनके पिता डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट पर इंजीनियर थे. शबाना ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी (लिंकन कॉलेज) से कानून की पढ़ाई की. वह कॉलेज के जूनियर कॉमन रूम (JCR) की अध्यक्ष बनीं. साल 2003 में उन्होंने Inns of Court School of Law से Bar Vocational Course पूरा किया और Gray's Inn से स्कॉलरशिप भी पाया. पेशे से वह बैरिस्टर बनीं और professional indemnity law में विशेषज्ञता हासिल की. उनका बचपन से सपना कानूनी दुनिया में नाम बनाना था.
पहली मुस्लिम महिला सांसदों में से एक
साल 2010 में जब क्लेयर शॉर्ट ने बर्मिंघम लेडीवुड से चुनाव लड़ने से इनकार किया, तो लेबर पार्टी ने शबाना को टिकट दिया. यह चयन विवादों में घिरा, लेकिन बाद में जांच ने उनके सेलेक्शन को वैध ठहराया. वह चुनाव जीतने वाली पहली मुस्लिम महिला सांसदों में से एक हैं , जिन्हें गृह मंत्री की जिम्मेदारी मिली है.
न्याय मंत्री से गृह मंत्री तक
साल 2024 के लेबर चुनावी विजय के बाद, शबाना महमूद को Lord Chancellor और Justice Secretary बनाया गया. यह पद हजार साल पुरानी परंपरा से जुड़ा है और शबाना इसे संभालने वाली पहली मुस्लिम बनीं. उन्होंने जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों की जल्दी रिहाई योजना लागू की, दंगों पर सख़्त बयान दिए और न्याय प्रणाली के सुधार पर काम शुरू किया. सितंबर 2025 में, जब उन्हें होम सेक्रेटरी बनाया गया, तो वह ब्रिटेन के कानून और व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाली पहली मुस्लिम महिला बन गई. अब उनकी इमिग्रेशन सुधार, अवैध प्रवास पर नियंत्रण, पुलिस सुधार और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई दिशा देने पर हैं.
सियासत और निजी विश्वास
शबाना अपने राजनीतिक सफ़र में हमेशा साफ़ कहती रही हैं कि उनके फैसले कॉमन सेंस और उनके विश्वास पर आधारित होते हैं. उन्होंने फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन में प्रदर्शन किए, लेकिन हमास के आतंकी हमलों की खुलकर निंदा भी की.
गुहावटी हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Guwahati High Court on Dima Hasao Land Allotment Case: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम के आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले में एक निजी सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (करीब 1,000 एकड़) जमीन दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर एक प्राइवेट कंपनी इतनी बड़ी जमीन कैसे खरीद सकती है? यह इलाका संविधान की छठी अनुसूची के तहत आता है.
दरअसल, इस जमीन आवंटन को लेकर 22 स्थानीय निवासियों ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी. सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी और राज्य के महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया के बीच इस मुद्दे पर लंबी बहस हुई. अदालत ने साफ कहा कि इतने बड़े भू-भाग को किसी निजी कंपनी को देना बेहद चौंकाने वाला है.
यूट्यूब पर लाइव सुनवाई
इस सुनवाई का सीधा प्रसारण हाई कोर्ट के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर किया गया. सुनवाई के दौरान जस्टिस मेधी ने कहा, "अदालत 3,000 बीघा जमीन के आवंटन से परेशान है. हम सिर्फ यह देखना चाहते हैं कि यह नीति बनी कैसे."
इस दौरान महाधिवक्ता सैकिया ने कोर्ट को बताया कि सीमेंट कंपनी ने 2 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से जमीन खरीदी है. हालांकि, अदालत ने सरकार से 3 सितंबर तक अपना विस्तृत हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है.
जज बोले- 'मैं तो हैरान हूं'
सुनवाई के दौरान जस्टिस मेधी 3,000 बीघा की बात सुनकर दंग रह गए. उन्होंने कहा, "पूरा जिला? क्या हो रहा है? एक निजी कंपनी को 3,000 बीघा जमीन दी जा रही है."
एनसी हिल्स स्वायत्त परिषद (NCHAC) के वकील ने अदालत में कुछ दस्तावेज़ पेश किए, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ कागज दिखाना काफी नहीं है, पूरी फाइल पेश करनी होगी. यह फाइल बताती हो कि छठी अनुसूची वाले क्षेत्र की इतनी बड़ी जमीन निजी फर्म को देने का फैसला कैसे हुआ.
पूरी फाइल पेश करने का आदेश
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने NCHAC से अगली सुनवाई में पूरी फाइल लाने का निर्देश दिया. वहीं, महाधिवक्ता ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी और उसकी रिपोर्ट भी सौंप दी गई है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क
अमेरिका का दूसरी राष्ट्रपति बनने के बाद अपने छह महीनों के कार्यकाल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टीवी सीरीज 'गेम ऑफ थ्रोन्स' के इस डायलॉग को सही साबित करते नजर आ रहे हैं. ऐसा इसलिए कि इस बार उनसे जिस शख्स से ने पंगा लिया है कि वो कोई और नहीं बल्कि उनके पुराने दोस्त और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क और न्यूयॉर्क शहर के मेयर प्रत्याशी जोहरान ममदानी हैं. एलन मस्क और जोहरान ममदानी की गलती ये है कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से प्रस्तावित 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' की तल्ख शब्दों में निंदा की है.
इस बात को लेकर ट्रंप ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए कहा दोनों से उनके मूल देश डिपोर्ट कर देंगें. यही वजह है कि टेस्ला के शेयर मंगलवार को बाजार खुलते बड़े पैमाने पर टूटे. इस घटना से तो यही लगता है कि पहली बाजी ट्रंप ने मार ली है. उन्होंने दिखा दिया है कि 'सत्ता की ताकत ही असली पावर है, पैसा कभी उसका मुकाबला नहीं कर सकता है'. टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच छिड़ी तीखी जंग, जिसने वॉल स्ट्रीट से लेकर भारतीय निवेशकों तक को सकते में डाल दिया है.
टेस्ला के शेयरों में यह उथल-पुथल तब शुरू हुई, जब ट्रम्प ने मस्क को अमेरिका से निर्वासित करने की धमकी दी. मस्क ने ट्रम्प के प्रस्तावित 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' को 'विशाल और बेतुका' बताते हुए इसे 'अमेरिका को कंगाल करने वाला' करार दिया. इसके जवाब में डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में प्रेस से बात करते हुए कहा, “मुझे नहीं पता, हमें देखना होगा. हम डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डोज) को एलन मस्क के खिलाफ कार्रवाई की इजाजत दे सकते हैं.
डोनाल्ड ट्रम्प ने मस्क पर निशाना साधते हुए कहा, “एलन मेरे बिल पर हमला कर रहे हैं, क्योंकि इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए सब्सिडी हटाने का प्रस्ताव है. वो इससे नाराज हैं, लेकिन मैं बता दूं, वो इससे कहीं ज्यादा खो सकते हैं.”
ट्रंप ने दी धमकी तो ममदानी ने दिया ये जवाब
जोहरान ममदानी जहां तक बात ट्रंप की जोहरान ममदानी से नाराजगी है तो उन्हें अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क मेयर की दौड़ में आधिकारिक रूप से डेमोक्रेटिक नामांकन हासिल किया है. जब रैंक-चॉइस वोटिंग के नतीजे अंतिम रूप से सामने आए तो राष्ट्रपति ने उन्हें निर्वासित करने की धमकी दी थी. इससे पहले मेयर प्रत्याशी बनने के बाद जोहरान ममदानी ने कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप के बयान सिर्फ हमारे लोकतंत्र पर हमला नहीं बल्कि हर उस न्यू यॉर्कर को संदेश देने का प्रयास हैं जो ट्रंप प्रशासन की बात मानने से इनकार करता है. अगर आप उनके खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो वे आपके पीछे पड़ जाएंगे. हम इस धमकी को स्वीकार नहीं करेंगे."
क्या अमेरिका से डिपोर्ट करने का वहां के कानून में प्रावधान है?
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन सही मायने में एलन मस्क और जोहरान ममदानी को देश से बाहर करना चाहता हैं तो उन्हें एलन मस्क को पहले कानूनी रूप से अपनी नागरिकता से वंचित करना होगा.
मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के रहने वाले मस्क 2002 में अमेरिकी नागरिक बने थे. इससे पहले वे कनाडा के नागरिक थे. मस्क जे-1 वीजा पर पढ़ाई करने के लिए अमेरिका आए थे. दावा है कि मस्क ने अमेरिका में अपना करियर शुरू किया था, तब वे कथित तौर पर एक अवैध अप्रवासी थे.
एलन मस्क 1995 में छात्र वीजा पर अमेरिका आए थे. उन्होंने कहा था कि वे स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया. इसके बजाय मस्क ने अपनी कंपनी जिप2 की स्थापना की. जिप2 सॉफ्टवेयर फर्म है, जिसे बाद में कॉम्पैक्ट ने 300 मिलियन डॉलर में खरीद लिया था.
साल 2005 में मानहानि के एक मुकदमे में इस्तेमाल किए गए ईमेल में एलन मस्क ने कहा था कि उन्होंने स्टैनफोर्ड में आवेदन किया था. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर वो ऐसा नहीं करते तो उनके पास अमेरिका में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था. हालांकि, इस तरह के दावों को मस्क ने बाद में इनकार कर दिया था.
यहां अहम सवाल यह है कि क्या टेस्ला और स्पेस एक्स के मालिक ने नागरिक बनने की प्रक्रिया के दौरान अमेरिकी सरकार से झूठ बोला था?
दरअसल, अमेरिका में किसी व्यक्ति से नागरिकता छीनने के प्रोसेस को डीनैचुरलाइज़ेशन कहा जाता है. ऐसा तब होता है जब सरकार से झूठ बोलकर या सच छुपाकर नागरिकता ली गई हो. ऐसे में जांच में यह पाया गया कि एलन मस्क ने किसी महत्वपूर्ण सच को जानबूझकर छुपाकर नागरिकता ली है तो उन्हें डीनैचुरलाइज की प्रक्रिया से गुजरना होगा. मस्क ने तब सच में झूठ बोला था तो उनकी नागरिकता जा सकती है और उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट भी किया जा सकता है.
नागरिकता छिनने की प्रक्रिया क्या है?
नागरिकता छीनने की प्रक्रिया आमतौर पर एक अदालत में शुरू होती है, जहां सरकार यह साबित करने की कोशिश करती है कि नागरिक ने नागरिकता प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी की या देश के प्रति निष्ठा को धोखा दिया है. यदि अदालत सरकार के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो नागरिक की नागरिकता छीन ली जाएगी.